Friday, November 9, 2012

56.कोई ........नहीं


कान्हा सन कोई प्रीत नहीं 
                       रूठ कर उनसे कोई जीत नहीं 
उनके  धुन  बिन कोई गीत नहीं
उनके बिन कोई रीत नहीं
उनसे   सुंदर कोई मीत नहीं  
 कान्हा सा दूजा  कोई प्रीत नहीं

बिनीता झा 

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