झरना अछि भूखल
नदी सँ भेंट लेल
नदी अछि भूखल
समुद्र सँ भेंट लेल
भूख ओकर ओहिना
भूख सँ व्याकुल फेर
उर्री गेल आकाश
बनि गेल ओ मेघ
बरिस पड़ल फेर आई धरती पर
करै लैल झरना स भेंट
ई भूख छी प्रकृति के देन
आई भूख स नै बची सकल कोई
की झरना की मनुख
बिनीता झा
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