आँसूओं से क्या डरना
ये तो मोती है दामन के
जब कभी कुचलती है दुनिया
बन जाते है यह अनमोल गहने
इनकी आगोश में सुकून खोजता मनु
पर सुकून के पास भी अब वक़्त कहा
एक दरिया सी है जिंदगी
हर शकस को है बहना यहाँ
अगर बहा सको तो बहा लो आँसु ख़ुशी के
इस दुनिया में और किसी की पूछ कहाँ ।
बिनीता झा
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