Wednesday, November 21, 2012

62.****आतंक का अंत**** -----21.11.12---- उतपाती कसाब


नाश कर सबका
 तू क्या पछतायेगा
फिर वही तांडव 
अगर छोड़  दिया जायेगा
जिस दिन से आया तू 
कयामत आ गयी
जिसको भी चाहा संभाल कर रखना
तुने उसे  मार गिराया 
ना तेरा आतंक घटा है 
ना घट पायेगा कभी 
छुट गया जो कैद से
तू फिर गज़ब ढाएगा
क्या करते भरोसा तुझ पर
तू तो जेल  में  भी था  उतपाती  बड़ा
तुझ से बेहतर तो है चुहा कैद में
कम से कम उत्पात कर  है सहमा पड़ा 
तुझ जैसे कभी ना  सुधरे है 
ना  सुधर पायेंगे उतपाती  कसाब 
फांसी पर चढ़ा कर आज तुझे 
यह देश तेरे  गुनाहों  से मुक्त  हो पाया है ।


बिनीता झा 

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