Friday, February 19, 2016

294.सवेरा

किसके रोके से रूका है सवेरा
अँधेरी रात के बाद आयेगा सवेरा

अपनों से दूर उदासी का घेरा 
मधुर मिलन पर  होता है सवेरा 

जज्बातों पर नहीं चलता मेरा तेरा 
वो रहता सदा रात हो या सवेरा 

कलम ने जब से बसाया है डेरा 
तो कैसी रात और कैसा सवेरा 

ह्रदय  में जब हों प्रभू  का बसेरा 
नहीं लगता बिनी दूर कोई सवेरा 

@बिनीता झा 



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