गणतंत्र स्वतंत्र भारत महान
बनल रहै देशक संविधान
खेतमे उपजै गहुम धान
भरल पुरल रहे खरिहान
आपस मे नहिं हुए क्लेश
नहिं क्यो बांटि सकै देश
आऊ बढाबि देशक मान
न्योछावर कर परै चाहे प्राण I
खेतमे उपजै गहुम धान
भरल पुरल रहे खरिहान
आपस मे नहिं हुए क्लेश
नहिं क्यो बांटि सकै देश
आऊ बढाबि देशक मान
न्योछावर कर परै चाहे प्राण I
जय भारत!
बिनीता झा
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