Tuesday, January 26, 2016

281.मनुख मात्र बेहाल अछि

चारू दिस बबाल अछि
सबलग ढेर सवाल अछि

वस्त्र  बनल रूमाल अछि
नबका जूगक कमाल अछि

लफूँआ हाजीर जबाब अछि
कियौ रोकत मजाल अछि

गरीबक जीवन जपाल अछि
महंगाई  केने निहाल अछि

कुव्यवस्था थिरकैयत ताल अछि 
मनुख मात्र बेहाल अछि

@बिनीता झा 

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