Sunday, November 30, 2014

188.इ केहन पगली बना देलौं अहाँ

मिठगर बोल से मना लेलौं अहाँ
खौजैल मोन त खसा देलौं अहाँ

निर्मोही सजन एक तरफ़ा सब दिन
सबटा हमर गलती  गना देलौं अहाँ

शान में  परल रहल जखन हिया
बीन टोकि हमरा कना 
देलौं अहाँ

निरर्थक इ जीवन अहाँ बिन सदा
बिन कहने बात जना देलौं अहाँ

ताकब बाट सब खन अहाँ के 
इ केहन पगली  बना देलौं अहाँ

बिनीता झा 

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