खंडरों में बस्ते है ख्वाब सुनहरे
कोई आये न आये ख्वाब सजते है
हर रात यहाँ, बिन बताये।
तितली उड़ती है पंख पसारे
खुशहाल लगती है सारी दुनियां
गम गम करता है जीवन।
सुबह आती है हक़ीक़त लिये
सो जाता है ख्वाब बिन बताये
सजने को बस, रात के लिये।
@ बिनीता झा
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