रिश्ते ख़त्म नहीं होते
चाहे लाख ठुकराये जमाना
ज़माने से रिश्ते नहीं
रिश्तों से है जमाना।
चाहे लाख ठुकराये जमाना
ज़माने से रिश्ते नहीं
रिश्तों से है जमाना।
वक़्त ठहरता नहीं बेशक
यही है उसका फ़साना
ठगा रह जाता इंसान
बढ़ जाता है जमाना।
यही है उसका फ़साना
ठगा रह जाता इंसान
बढ़ जाता है जमाना।
@ बिनीता झा
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