Sunday, November 12, 2017

450.की - की देखल

असगर देख घुरैत देखल
बिच बाजार सटैत देखल
गुंडा गर्दी बढ़ैत देखल
दादा-गिरी माथ चढ़ैत देखल
लोक लाज  छोड़ैत देखल
हाय रे बिनी, की-की देखल!

गुरूजन के सतबैत देखल
झनैक-झनैक बजैत देखल
बात बेबात फंकैत देखल
मान सम्मान घोसरैत देखल
मानवताके सिमटैत देखल
हाय रे बिनी, की-की देखल!

लोभ परपंच पसरैत देखल
धुरफंदी में फसैत देखल
नौकरी लेल रपटैत देखल
ज्ञानक दाबी दैत देखल
अनेर हाय-हाय करैत देखल
हाय रे बिनी,की-की देखल!
@बिनीता झा

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