Thursday, December 27, 2012

77. रिश्ता

बंद खिड़की पर इंतज़ार उनका
खुली खिड़की तो मस्ती उनकी

क्या रिश्ता है उनका मुझसे
क्यों खिलती  है कलीयाँ  उनके आने पर

क्यों वीरान होता है शहर  उनके जाने से
क्यों बाट जोहती है जिंदगी  रोज़ नये सिरे से

कोई तो बता दे मेरा यह हाल क्यों है
कोई तो समझा दे आखिर राज़ क्या है?

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