Sunday, December 9, 2012

68. कुछ नहीं बदला है हम में या तुम में

बीतता है हर पल तुझको ढूढने में

भीड़ में हो हम या हो अकेले में

सर्द हो जाती है आहें तेरे इंतजार में

वक़्त गुजरता है दिल को तन्हा छोड़ सीने में

लब्ज़ तेरे जगाते है आज भी आवारगी मुझ में

सांसे गिनती हूँ प्यार लिये तेरा अपने दिल में

जानती हूँ कुछ नहीं बदला है हम में या तुम में

पर सब कुछ बदल दिया है जिम्मेदारियों ने हम में ।



बिनीता झा

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