उखी-बिखी लागल अछि
नै कहि कौन खन कि कतः हौयत।
सब उखराहा उकटब उतकट
मौन क गेल हताश उदास
नै कहि कौन खन कि कतः हौयत।
सब उखराहा उकटब उतकट
मौन क गेल हताश उदास
उदयम से भेल मोन उचाट
जीवन भेल उतकट उजार
जीवन भेल उतकट उजार
उदित करू हमर संसार
उत्साह उबटल जीवन से।
शरण में लिय दीनानाथ
उबारू हर कष्ट से माधव।
उऋण करू जीवन उगना
उत्साह उबटल जीवन से।
शरण में लिय दीनानाथ
उबारू हर कष्ट से माधव।
उऋण करू जीवन उगना
उधार करू उद्भट माधव रे।
@बिनीता झा
@बिनीता झा
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