Sunday, May 19, 2013

110.वरदान

 
भोर भेल हे सखी

उठू लोढी आनी फूल

आउ सजाबी माँ जानकीकँ

आउ करि हिनक श्रृंगार

आउ शीश झुका पूजा करी

आउ सब मिल मनाबी

जानकी जन्मदिवसक त्यौहार

आउ करी हम सब प्रार्थना

आउ नीक आचरणसँ

करियैन हुनक सम्मान

जाइत पाँइत कए दूर भावनासँ

उठए ऊँच अहि माटिक संतान

विद्याक होइक बास दिमाग मे

कलम पर होइक सबकँ दियमान

अनपूर्णा रहैथ भंडार मे

लक्ष्मी बसैत आंगन द्वार मे

बनल रहै खेत खलियान

सभक चित होइक ख़ुशी

नै क्यौ होइक उदास दुखी

करनी सभक हुए उत्कृष्ट

बोली मिठगर मिश्री सन

द्वेष कलेशक भावनासँ

उपर होइत हिनक सभ संतान

हे जानकी हम माँगए छी

अपना मिथिला लेल

अहाँसँ बस यैह वरदान

--बिनीता झा
 

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