Thursday, October 25, 2012

50.हमराज







रिश्तों  की  बेड़ियों  मे जीता है तू 
तू खुश नहीं इसका अह्सास है मुझको 

हर किसी को खुश करने की चाहत है तुझमें 
पर खुद घुट- घुट के  जीता  है लगता मुझको 

तेरे  लबों पर मुसकान  तो  है बिखरी 
पर आंखें सूनी सूनी दिखती है मुझको 

लाखों  जख्म तू ने  छुपाये है  दिल मे  
तेरे  चहरे पे साफ नज़र आता  है मुझको 

ना  कहना यह  महज  है मेरा वहम 
अगर जाना जरा सा भी है  तुने मुझको 

तेरी खुशियाँ  है सिर्फ चाहत मेरी 
क्या बना सकता है हमराज तू अपना मुझको??

बिनीता झा 

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