Wednesday, January 3, 2018

488.समय

ढीठेल चलत समय
सदिखन चलत  समय ।
सबके लपेटैत घेरैत
निष्पक्ष रहत समय।

नीक बेजाए समेटैत
चुपचाप बढत समय ।
रोकलो पर भागैत
नै ठहरत समय।

तमासा खूब देखैत
घूमैत फिरत समय।
मेटैेने ने मेटाईत
सत्य कहत समय।
@ बिनीत झा

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