Friday, August 14, 2015

243.आउ चन्ना आउ ने


आउ चन्ना आउ ने 
अमावस के पूनम बनाऊ ने 

मध्य रात्रि आउ ने
मीत बनी जाउ  ने


नैनक प्यास बुझाउ  ने 
राग मधुर सुनाउ  ने

फुलबारी हमर गमकाउ  ने 
अपन शीतलता बरसाउ ने 

ओ चन्ना आउ ने 
हमर हिया जुराउ  ने

Binita Jha

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