Thursday, August 15, 2013

124.जन जन उठू जागू

जन जन उठू जागू
मनाउ पाबैन आजादीक
प्रानक बाजी लगाकँ लाखो
दियौलक हमरा अहाँ क' आजादी
शोनितक धार बहलए
लाठी डन्टा निर्बल पर चललए
चुप सहलक नै हटल पाछू
सर्वस्व लुटौलक देशक लेल
कोना जाए दबए बलिदान खाली
कोना बढए देबए...
अत्याचारी आ भ्रष्टाचारीकँ
गरीबी आ भुखमरीकँ
आउ उठी सभ करी प्रण
आउ संग मिलि कोशिश करी
आउ छोड़ी स्वार्थ आगू बढी
आउ बढाबी ऐ देशक मान

बिनीता झा
१५.०८. २०१३

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