Zion
Wednesday, March 28, 2012
19.अभिलाषा
बहुत दूर बैठी सोचती हु
तुम्हारे बारे मे
स्वप्न जैसा हर पल याद आता है
चाहा था कुछ पल साथ तुम्हारा
पर वक़्त को शायद यह बात कुबूल ना हुआ
तुम ने छुपी साध कर अपनी मज्बूरिया बयां कर दी
और हम अपनी अभिलाषाओ को हवन की आहुति दे गये
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