Wednesday, March 28, 2012
Tuesday, March 27, 2012
17.ना भुला पाती हूँ
अश्कों के चादर पर सोती हूँ
दिन के उजाले मे मुस्कुराती हूँ
ग़मों को धो कर पीती हूँ
ग़मों को धो कर पीती हूँ
जिंदगी रफ़्तार से चलती है
पर एहसासों को न भुला पाती हूँ
पर एहसासों को न भुला पाती हूँ
दुनिया की हर बात
तो समझा ली मैंने दिल को
तो समझा ली मैंने दिल को
पर उनका यह कहना
."नI तुम समझ पाओगी ,नI कोई समझ पायेगा तुझको "
चुभ गयी दिल मे ।
क्या करू शिकायत ,
किस से करू ....................
किस से करू ....................
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