Tuesday, February 7, 2012

16.कभी सवेरा न हो


तकलुफ़ न कर ,लुफ्त उठा 
जिंदगी  है ,जी ले जी भर के
कल की सुबह हो न हो 
पर आज तो  तेरा है 
बसजा आके मेरी रग रग में 
की कभी  सवेरा न हो।


बिनीता झा


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