जहाँ कभी हलचल था,अजीब सा सनाटा है जहाँ कभी गाँव था,आज वहाँ शहर है । कूछ देर कोलाहल था,फिर सब शांत थे मेरा शहर थक कर शायद सो गया था।
@बिनीता झा
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