Monday, December 11, 2017

479. शहर

जहाँ कभी हलचल था,अजीब सा सनाटा है
जहाँ कभी गाँव था,आज वहाँ शहर है ।
कूछ देर कोलाहल था,फिर सब शांत थे
मेरा शहर थक कर शायद सो गया था।

@बिनीता झा

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