कसमों में बांध जवाब चाहता है
गज़ब जिंदगी आज हिसाब चाहता है
देख हर रोज करोरों का घोटाला
ओढ़ने को जिंदगी हिज़ाब चाहता है
लिखता,गाता और नाचता जब कोई
जिंदगी पाने को ख़िताब चाहता है
लाल बती वाली गारी में बैठकर
देखो नेता कैसे रुबाब चाहता है
दो रोटी की चाह में खड़ा भूखा
अनाज ना की कबाब चाहता है
जलाओं ना विद्यालयों को हे पापी
बच्चा पढ़ने को किताब चाहता है
@बिनीता झा
गज़ब जिंदगी आज हिसाब चाहता है
देख हर रोज करोरों का घोटाला
ओढ़ने को जिंदगी हिज़ाब चाहता है
लिखता,गाता और नाचता जब कोई
जिंदगी पाने को ख़िताब चाहता है
लाल बती वाली गारी में बैठकर
देखो नेता कैसे रुबाब चाहता है
दो रोटी की चाह में खड़ा भूखा
अनाज ना की कबाब चाहता है
जलाओं ना विद्यालयों को हे पापी
बच्चा पढ़ने को किताब चाहता है
@बिनीता झा
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