दिल मे छुपा कर मुहबत मेरा
कह रहे है मुहबत नहीं है
बहुत हुई है भूल मुझसे पर वो
कह रहे है शिकायत नहीं है
दफ़न कर दर्द कैसे जीयु
जीने की आदत नहीं है
खंजर उठा के मर ही डालो
अब जीने की चाहत नहीं है
बादलो से कोई कह दे
अब सावन की जरुरत नहीं है
बिनीता झा
कह रहे है मुहबत नहीं है
बहुत हुई है भूल मुझसे पर वो
कह रहे है शिकायत नहीं है
दफ़न कर दर्द कैसे जीयु
जीने की आदत नहीं है
खंजर उठा के मर ही डालो
अब जीने की चाहत नहीं है
बादलो से कोई कह दे
अब सावन की जरुरत नहीं है
बिनीता झा
No comments:
Post a Comment