वो सब कुछ जीत के भी हार गये या यूँ कहू की उनके हार मै ही उनकी जीत थी |सारी दुनिया उनके मुठी मे थी,पर उन्होने उसे जाने दिया | उनकी जगह कोई और होता तो शायद ऐसा कभी नहीं होता | आज की दुनिया मै जहाँ लोग सिर्फ सांसारिक सुख के पीछे भागते है, वहां अपने आप पर निरंतर रखना बहुत ही कठिन रहा होगा |लेकिन उसी कठिनाई का सामना करने वाला व्यक्ति तो मन को भाता है |आम लोगो से अलग, वो अपनी पहचान दिल की गहराई मै छोर जाता है| जहाँ भले ही उसे कोई न देख पाये पर उसके होने का एह्सा जीवन काल मै सदा बना रहता है | कभी कभी मचल जाता है मन ,शब्दों क लिये, पर अब एहसास है "हम्म " मै भी संवाद रहता है | दूर बैठी दुआ करती हूँ ,"वो कभी ना बदले "|
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