Sunday, October 16, 2011

वो

वो सब कुछ जीत  के भी हार  गये या यूँ कहू की उनके  हार मै ही उनकी जीत थी  |सारी दुनिया उनके  मुठी मे थी,पर उन्होने उसे जाने दिया | उनकी जगह कोई और होता तो  शायद ऐसा कभी   नहीं होता | आज की दुनिया मै जहाँ   लोग सिर्फ सांसारिक सुख के पीछे भागते है, वहां अपने आप पर  निरंतर रखना बहुत ही कठिन रहा होगा |लेकिन उसी कठिनाई का सामना करने वाला व्यक्ति तो  मन  को भाता है |आम लोगो से अलग, वो अपनी पहचान दिल की गहराई मै छोर जाता है| जहाँ भले ही उसे कोई      न देख पाये  पर उसके  होने का  एह्सा  जीवन काल   मै सदा बना रहता है | कभी कभी मचल जाता है         मन ,शब्दों क लिये, पर अब एहसास है  "हम्म "  मै भी संवाद रहता है | दूर बैठी दुआ करती  हूँ  ,"वो कभी ना बदले "|

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